एक ऐसा पर्यावरण प्रेमी जिसने पांच "ज" व "क" के सिद्धांत को कर रहे साकार, आप भी होंगे लाभान्वित


उन्नाव जनपद के एक छोटे से गांव में जन्मे संतोष कुमार बाजपेई बताते हैं कि उनका बचपन से ही पेड़ पौधों से अगाध प्रेम था । इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद विधि में स्नातक किया । उसके बाद उन्हें गोंडा जनपद के मनकापुर आईटीआई में इंजीनियर के पद पर तैनाती मिल गई । यहां पर तैनाती के दौरान उन्होंने अपने इस मुहिम को काफी रफ्तार दिया । वर्तमान में नैनी आईटीआई मैं सहायक विधि अधिकारी के रूप में तैनाती है ।

जनपद में तैनाती के दौरान लाखों आम सहित विभिन्न पौध का कराया रोपण जिले में तैनाती के दौरान जब बाजपेई को ड्यूटी से छुट्टी मिलती या फिर अवकाश के दिनों में वह अपने स्कूटर पर एक दर्जन पौधों को लादकर किसी न किसी विद्यालय में पहुंच जाते वहां पर बच्चों की एक टीम बनाकर इन पौधों को रोपित कराते । प्रत्येक बच्चे को पौधों का महत्व समझाते हुए एक एक पौध के देखभाल की जिम्मेदारी उन्हें सौंप देते । वह बताते हैं कि जब बच्चों की समझ में यह बात आ जाती थी । की उनके विद्यालय छोड़ने के बाद उनके यादगार के रूप में पौध विद्वान रहेगा । तो वह बड़ी लगन के साथ उसकी देखभाल करते थे । जिसका परिणाम यह रहा कि आज भी वे पौध वृक्ष के रूप में विभिन्न विद्यालयों में विद्यमान हैं ।

वृक्षारोपण को संस्कार से जोड़ने की मुहिम चलाई जीवन बचाओ आंदोलन के प्रमुख पर्यावरणविद श्री बाजपेई 3 जून 1990 से पृथ्वी के साथ मानव के अस्तित्व की रक्षा हेतु बच्चे के जन्म होने तथा प्रतिवर्ष जन्म दिवस विवाह के अवसर पर पौधे दान कर उनसे पौध रोपित कराते हैं । अपनी शादी में पत्नी के साथ परिणय पौध रोपित कर वृक्षारोपण को संस्कार से जोड़ने की मुहिम चलाया ।

पिता की राह पर चलने की प्रेरणा माता से मिली

महज 17 साल अल्प की अल्पायु में इनके पिता हीरालाल बाजपेई का निधन हो गया । उनका प्रकृति से अगाध प्रेम होने के कारण अपने घर के आस-पास व गांव में पौधों को रोपित करा कर अपने गांव को हरा भरा रखने का पूरा प्रयास करते थे । पर्यावरण के महत्व को समझाते हुए अपने पूरे इलाके में उन्होंने लोगों को पौध लगाने के लिए हमेशा जागरूक करते रहते थे । उनकी मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए इनकी मां चंद्रवती हमेशा इन्हें उत्साहित करती रहे ।

गांव पर बनवाया प्रेरणा स्थल ताकि मुहिम की शुरुआत की बनी रहे यादगार वर्ष 1990 से अपने गांव से ही पांच (ज) जल, जमीन, जंगल, जलवायु, जनसंख्या के सिद्धांत पर काम करने की शुरुआत की । इस वर्ष को यादगार बनाने के लिए उन्नाव के विरसिंहपुर गांव में प्रेरणा स्थल का निर्माण करा कर इसे पंचवटी का रूप दिया । इस पंचवटी में 24 घंटे ऑक्सीजन देने वाले पौधों के अतिरिक्त विभिन्न तरह के फल फूल के वृक्षों से इसे सजाया । यादगार के रूप में प्रतिवर्ष पर्यावरण दिवस के मौके पर यहां पर विभिन्न तरह के जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है ।



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