बापू का अपमान मामला: कालीचरण की जमानत याचिका खारिज, हाईकोर्ट जाने की तैयारी


रायपुर. न्यायिक रिमांड पर जेल भेजे गए कालीचरण बाबा की जमानत याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। 12वें एडीजे विक्रम प्रताप चंद्रा ने सोमवार को इसका फैसला सुनाया। करीब एक घंटे से भी अधिक समय तक चली बहस के दौरान कालीचरण के अधिवक्ता मेहल जेठानी ने कहा कि उनके पक्षकार राजद्रोह का मामला ही नहीं बनता है।

राजद्रोह का मामला राज्य के खिलाफ होता है जबकि कालीचरण के मामले में प्रार्थी प्रमोद दुबे है। वहीं गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके पक्षकार को गिरफ्तारी के बाद स्थानीय कोर्ट में पेश किया जाना था। लेकिन, नियमों को ताक पर रखकर सीधे रायपुर लाया गया। यह संविधान की धारा 21 और 22 का उल्लंघन है। लोक अभियोजन केके शुक्ला ने जमानत आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि मामला एक व्यक्ति को गाली देने का नहीं है।

हाईकोर्ट जाने की तैयारी
कालीचरण द्वारा दिया गया बयान वर्ग को भड़काने वाला है। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति निर्मित होने के पहले ही कार्रवाई करते हुए अपराध घटित होने के पहले ही रोक लिया गया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद जमानत आवेदन को खारिज कर दिया। कालीचरण के अधिवक्ता ने बताया कि जमानत खारिज होने के बाद हाईकोर्ट आवेदन लगाया जाएगा। इसके संबंध में दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। इसे जल्दी ही हाईकोर्ट में पेश किया जाएगा।

ट्रांजिट रिमांड पर आज सुनवाई
कालीचरण को ट्रांजिट रिमांड पर ले जाने के लिए महाराष्ट्र पुलिस द्वारा सीजेएम भूपेंद्र वासनीकर की अदालत में आवेदन लगाया है। इस मामले में मंगलवार को सुनवाई होगी। महाराष्ट्र पुलिस द्वारा पेश किए गए आवेदन में बताया गया है कि कालीचरण के खिलाफ के अलग-अलग थाना में प्रकरण दर्ज है। इसके संबंध में पूछताछ की जरूरत है।



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