यह नेता बचपन में ढोता था लकड़ी, फिर बाद में बन गया हरियाणा सरकार में मंत्री, अब बोलते हैं 'सुपर सीएम' – News18

धीरेन्द्र चौधरी/रोहतकआपने फिल्मों में देखा होगा कि किस तरह से इंसान की तकदीर बदलती है.वह फर्श से अर्श तक जा पहुंचता है.आज हम आपको एक ऐसी राजनैतिक शख्सियत के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका जीवन भी फिल्मी करैक्टर की तरह हकीकत में बदल गया.

बचपन में ढोते थे लकड़ी

इस शख्स ने बचपन में स्कूल में जाते-जाते हर रोज लकड़ी ढोई और उसके बदले में मिले बुरादे से अपने परिवार का चूल्हा जलाने में सहयोग दिया. पिता मजदूरी करते थे. 1947 में बंटवारे के वक्त मां-बाप 3 साल तक एक दूसरे से जुदा रहे, लेकिन संघर्ष करते-करते वह इंसान उस मुकाम तक जा पहुंचा, जहां उसे आजकल हरियाणा में लोग सुपर सीएम तक कहते हैं.हम बात कर रहे हैं रोहतक के पूर्व विधायक एवं पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर की, जिनकी मुख्यमंत्री मनोहर लाल से बेहद नजदीकी है.

लगातार 3 बार चुनाव हारे

ग्रोवर लगातार तीन चुनाव हारे थे, लेकिन 2014 में चौथी बार वे विधायक बने तो मनोहर लाल खट्टर सरकार में सहकारिता राज्य मंत्री बने. हालांकि 2019 में वे फिर से बीबी बत्रा के मुकाबले में चुनाव हार गए, लेकिन मनीष ग्रोवर ने अपना हौसला नहीं खोया. वे अपने विधानसभा क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहते हैं और उन पर आरोप है कि वह अपने घर से ही सरकार भी चलाते हैं और मुख्यमंत्री ने उन्हें फ्री हैंड कर रखा है. मनीष ग्रोवर के घर पर सुबह से लोग आने शुरू हो जाते हैं और देर रात तक उनके पास काम करवाने वालों की लंबी लाइन लगी रहती है.इस पर ग्रोवर कहते हैं कि वह राजनीति में जनता के काम करने के लिए ही हैं और अगर उनके फोन से किसी का काम हो जाता है तो इसमें क्या गलत होता है. मुझे हार का कोई गम नहीं है, इस बार मुझे नकार दिया तो हो सकता है कि आगे जनता फिर से मुझे जिताएगी. वे संगठन के कार्यकर्ता है और जो संगठन उनकी जिम्मेदारी लगाएगा, उसे भी बखूबी निभाएंगे.

बंटवारे के वक्त माता-पिता 3 साल अलग रहे

ग्रोवर का कहना है की बचपन से उन्होंने संघर्ष देखा भी है और किया भी है, इसलिए वे हार-जीत से नहीं घबराते.खुद के राजनीति में आने की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि बंटवारे के वक्त से ही कांग्रेस पार्टी ने देश को दो हिस्सों में बांटने का काम किया, जिससे वे कांग्रेस पार्टी से नफरत करते हैं, क्योंकि इसी पार्टी की वजह से लाखों लोग घर से बेघर हुए, बहुत से लोगों की जान गई.बंटवारे के वक्त उनके मां-बाप भी 3 साल तक अलग रहे. पिता जालंधर शरणार्थी कैंप में रहे तो मां अंबाला शरणार्थी कैंप में.दोनों को एक दूसरे का पता भी नहीं था कि वह जिंदा हैं भी या नहीं.

होश संभालते ही आरएसएस से जुड़ गए

मनीष ग्रोवर ने बताया कि उन्होंने होश संभाला तो शुरू से ही आरएसएस से जुड़ गए थे और बाकायदा वे संघ की शाखा में भी जाते थे.स्कूल टाइम में परिवार की हालत इतनी दयनीय थी कि स्कूल जाते वक्त रास्ते में लक्कड़ उतार कर मजदूरी करते थे और उसके बदले में कुछ लकड़ियां और बुरादा मिलता था, जिससे उनके परिवार का चूल्हा जलता था, यह उनके परिवार की हकीकत है. पिता भी मजदूरी का काम करते थे. आज संघर्ष के बूते यहां तक पहुंचे हैं और भगवान ने मौका दिया है लोगों की सेवा करने का तो वह उनके काम करते हैं. चाहे सत्ता में हैं या सत्ता से दूर.इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.रोहतक की जनता ने उन्हें आशीर्वाद दिया है और जब तक जनता साथ देगी, वह इसी तरीके से काम करते रहेंगे. बोलने वाले चाहे कुछ भी बोलते रहें, कोई फर्क नहीं पड़ता.

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Source : hindi.news18.com