ये है बिहार का इंडस्ट्रियल गांव, सालाना 10 करोड़ तक का होता है टर्नओवर – News18

गुलशन कश्यप/जमुई : कहा जाता है कि देश की आत्मा गांव में बसती है और गांव के लोग कृषि प्रधान होते हैं. लेकिन बिहार का एक गांव ऐसा भी है जिसने खुद को आत्मनिर्भर बना लिया है. यह गांव बिहार का इंडस्ट्रियल गांव बन गया है. इस गांव के लोग एक ही कारोबार में लगे हुए हैं और सालाना 10 करोड रुपए तक का टर्नओवर कर लेते हैं.

दरअसल, हम बात कर रहे हैं जमुई जिला के गोपालपुर पंचायत अंतर्गत पड़ने वाले घनबेरिया गांव की. यहां के लोग पेड़ा कारोबार से जुड़े हैं और इस कारोबार से सालाना 10 करोड रुपए तक का टर्नओवर कर ले रहे हैं. इस गांव में लोगों का मुख्य पेशा पेड़ा कारोबार बन गया है और गांव के लोग खेती-बाड़ी के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पेड़ा का उत्पादन करने में लगे हुए हैं.

18 लाख लीटर दूध की होती है सालाना खपत

इस गांव में पेड़ा की दुकान चलाने वाले बिट्टू कुमार सिंह, रोशन सिंह सहित अन्य कारोबारी ने बताया कि घनबेरिय चौक पर पहले एक दुकान हुआ करता था. लेकिन वर्तमान में इसकी संख्या 20 से अधिक हो गई है. इस चौक पर प्रतिदिन एक हजार किलो तक पेड़ा की सप्लाई होती है. 1 किलो पेड़ा बनाने के लिए 5 किलो दूध का इस्तेमाल किया जाता है.

इस प्रकार इस गांव में प्रतिदिन 5 हजार लीटर दूध की खपत होती है और इस हिसाब से देखा जाए तो इस गांव में 1 साल में 18 लाख 25 हजार लीटर केवल दूध की खपत होती है. इसके बाद इसे करीब 3 लाख 65 हजार किलो पेड़ा का उत्पादन होता है. पेड़ा का मार्केट वैल्यू 260 रुपये प्रति किलो है और इस गांव के लोग एक साल में लगभग 9 करोड़ 49 लाख रुपए का पेड़ा का कारोबार करते हैं.

गांव का नाम ही बन गया है ट्रेडमार्क

घनबेरिया का पेड़ा अपने आप में एक ट्रेडमार्क बन गया है. यहां के लोग पेड़ा उत्पादन में किसी विशेष प्रकार की पैकेजिंग नहीं करते हैं और ना ही इसकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग की जाती है. इसके बावजूद यहां का पेड़ा विदेशों में भी सप्लाई किया जाता है. स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि जमुई के अलावा पटना, देवघर, भागलपुर इत्यादि शहरों में यहां का पेड़ा भेजा जाता है.

देवघर में बड़े पैमाने पर इस गांव का पेड़ा बिकता है. कई जगह छोटे-छोटे स्टॉल लगाकर भी यहां का पेड़ा बेचा जाता है.रोशन सिंह ने बताया कि यहां का पेड़ा स्वीडन, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों में भी भेजा जाता है. खास कर उन देशों में रहने वाले नॉन रेजिडेंट्स इंडियन (एनआरआई) अपने साथ यहां का पेड़ा संदेश के रूप में ले जाते हैं. घनबेरिया गांव पेड़ा कारोबार के नाम से हीं जाना जाता है और यह अपने आप में एक समृद्ध गांव बन गया है.

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Source : hindi.news18.com