शिवराज की लोकसभा चुनाव मुहिम के बीच खंडवा में सांसद के खिलाफ घेराबंदी – News18

रिपोर्ट-अमित जायसवाल

खंडवा. विधानसभा चुनाव निपटने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब लोकसभा चुनाव के अभियान पर निकल पड़े हैं. वो अब 2024 में प्रदेश की सभी 29 सीटें जीतने की जुगत में लग गए हैं. लेकिन खंडवा संसदीय क्षेत्र में टिकट कटने से नाराज विधायकों ने काकस तैयार कर लिया है. टिकट कटने की वजह सांसद को बताते हुए उनके खिलाफ एकजुट होकर मोर्चा खोल दिया है. सांसद कह रहे हैं पार्टी जीतने वालों पर दांव लगाती है. खंडवा में सर्दी के सीजन में राजनीतिक गर्मी बढ़ गयी है.

खंडवा संसदीय क्षेत्र में टिकट कटने से नाराज विधायकों ने एकजुट होना शुरू कर दिया है. खंडवा, पंधाना, नेपानगर और बड़वाह में इनकी बैठकें भी हो गई हैं. जबकि संसदीय क्षेत्र के मांधाता, बुरहानपुर, बागली और भीकनगांव में ये रणनीति बनाने की तैयारी में हैं. इसके साथ ही भाजपा की अंदरूनी कलह सामने आ रही है. ये सारे नेता अपना टिकट कटने के लिए सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल को जिम्मेदार मान रहे हैं. असंतुष्ट विधायकों ने अब सांसद पाटिल का टिकट कटवाने के लिए लॉबिंग शुरू कर दी है.

सांसद का टिकट कटवाने की जुगत
इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा ने खंडवा संसदीय क्षेत्र के 4 सिटिंग एमएलए खंडवा से देवेंद्र वर्मा, पंधाना से राम दांगोरे, नेपानगर से सुमित्रा कास्डेकर और बागली से पहाड़ सिंह का टिकट काटा दिया था. अब इनके साथ ही बड़वाह से पूर्व विधायक रहे हितेंद्र सिंह सहित भीकनगांव और बुरहानपुर और मांधाता के नाराज नेता भी साथ आने लगे हैं. पूर्व विधायकों ने कहा पूर्व सांसद नंदकुमार सिंह चौहान ढाई लाख वोट से जीते थे. जबकि उपचुनाव में ज्ञानेश्वर पाटिल सिर्फ 80 हजार वोट से जीते थे. खंडवा क्षेत्र में विधानसभा चुनाव के रिजल्ट से ज्यादा इस राजनीतिक उठापटक की चर्चा ज्यादा हो रही है.

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सांसद बेपरवाह
टिकट कटने से नाराज विधायकों के लामबंदी करने पर सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने भी कटाक्ष किया है. उन्होंने कहा ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. कुछ लोगों की आदत ही इस तरह की फितरत फैलाने की है. उन्होंने ये भी साफ कर दिया कि पार्टी जीतने वालों पर दांव लगाती है. मैं संसदीय क्षेत्र में लोगों के काम कराने में व्यस्त हूं. मेरी मालिक जनता और पार्टी है. इनका जो आदेश होगा, उसका पालन करूंगा. इस बार खंडवा की 8 में से 7 सीटों पर भाजपा की जीत हुई है. इसलिए सांसद भी बेटिकट विधायकों की लामबंदी को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं.

टिकट कटा को फफक पड़े
टिकट कटने के बाद खंडवा विधायक देवेंद्र वर्मा कार्यकर्ताओं के बीच फफक फफक कर रो पड़े थे. उन्होंने सोशल मीडिया पर पूछा आखिर आदिवासी विधायकों के टिकट क्यों काटे जाते हैं? किसकी सीनियरिटी को खतरा है? खंडवा संसदीय क्षेत्र की 8 में से 5 सीटों पर जनजाति का प्रभाव है. जबकि अनुसूचित जनजाति भी प्रभावी है. ऐसे में इन वर्गों के नाराज विधायकों की लामबंदी भाजपा खेमे की चिंता बढ़ा रही है.

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Source : hindi.news18.com