क्या कसरत से बढ़ती है लोगों की उम्र? नए रिसर्च में हुआ खुलासा, अलर्ट रहें – News18

नॉर्विच (ब्रिटेन). सही और स्वस्थ जीवनशैली के लिए लोगों के जीवन में व्यायाम और योग काफी योगदान होता है. ऐसा हम नहीं बल्कि कई शोध के परिणाम कहते हैं. लेकिन क्या इंसानों की जीवनशैली दीर्घायु होने के लिए जरूरी हैं? क्या कहते हैं वैज्ञानिकों के सर्वेक्षण? कई शोधों से पता चला है कि जो लोग अधिक व्यायाम करते हैं वे अधिक समय तक जीवित रहते हैं.

हाल ही के ‘फिनिश ट्विन्स कोहोर्ट स्टडी’ (The Finnish Twin Cohort Study: an Update) की एक रिपोर्ट को देखकर शोधकर्ताओं ने आश्चर्य जताया है.स्टडी का कहना है कि जीवन पर ‘खाली समय की शारीरिक गतिविधि’ का कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ता है. यह अध्ययन दूसरों से किस तरह अलग है – और क्या यह सही है, जानना काफी जरूरी है?

इंसानों का व्यवहार और जीव विज्ञान एक जटिल विषय हैं. इसमें व्यापक समाज व पर्यावरण के साथ परस्पर क्रिया होते रहता. कोई व्यक्ति कितना व्यायाम करता है, यह उनके आनुवंशिकी, आहार, विकलांगता, शिक्षा, धन, या केवल उनके पास पर्याप्त खाली समय और सुरक्षित हरित स्थान से जुड़ा होता है. इनमें से प्रत्येक कारक को अलग-अलग तरीकों से जीवन काल से भी जोड़ा जा सकता है.

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संभवतः दर्जनों अन्य चीजों के बारे में सोचे तो किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य और उनके द्वारा किए जाने वाले व्यायाम, दोनों से एक दूसरे से परस्पर जुड़ी हो सकती हैं. इन कारकों की दिशा हमेशा स्पष्ट नहीं होती, हालांकि यह निश्चित रूप से सच है कि जो लोग अधिक व्यायाम करते हैं, वे औसतन अधिक समय तक जीवित रहते हैं, लेकिन यह जानना कहीं अधिक कठिन होगा कि इन अन्य कारकों की तुलना में व्यायाम के कारण कितना जीवन बढ़ जाता है.

फिनलैंड जुड़वां बच्चों पर अध्ययन यहां पर हमारी मदद कर सकता है. जुड़वां बच्चों के आनुवंशिकी और प्रारंभिक जीवन के अनुभव समान या पहचान योग्य होते हैं, इसलिए हम यह पता लगा सकते हैं कि उनके बाद के जीवन के व्यवहार में अंतर उनके जीवनकाल को कैसे प्रभावित करता है.

फिनलैंड में ज्यवास्किला विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने बिल्कुल इसी दृष्टिकोण अपनाते हुए शोध किया है. उन्होंने 1975, 1981 और 1990 में वयस्क समान लिंग वाले 11,000 जुड़वां बच्चों के व्यायाम के बारे में पुछे गए सवाल का उपयोग करते हुए अध्ययन किया और साल 2020 में उनकी मृत्यु के बाद उसका तुलनात्मक अध्ययन किया. अध्ययन के बाद पाया गया कि अपेक्षानुरूप सबसे कम सक्रिय लोगों की तुलना में सबसे अधिक सक्रिय लोगों में मृत्यु दर 24 प्रतिशत कम थी.

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शोधकर्ताओं ने उनके जैविक आयु को भी देखा, इसे डीएनए क्षति (मिथाइलेशन) की डिग्री से मापा गया और आश्चर्यजनक रूप से पाया कि सबसे अधिक और सबसे कम सक्रिय समूह दूसरों की तुलना में जैविक रूप से अधिक उम्र के रहे. वहीं जांच में धूम्रपान, शराब के सेवन और बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) को भी रखा गया था. इस हालत में व्यायाम का असर दीर्घायु लोगों को करने में असफल रहा. सबसे कम सक्रिय समूह और अन्य के बीच मृत्यु दर में केवल 9 प्रतिशत का अंतर रहा – और अत्यधिक और मध्यम सक्रिय समूह के बीच कोई अंतर नहीं दिखा.

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि इस बात की काफी संभावना है कि अधिक व्यायम करने वाले व्यक्ति अधिक समय तक जीवित रहते हैं, हालांकि कुछ मामलों में ऐसा नहीं भी हो सकता जैसे कि व्यायाम के साथ धूम्रपान. व्यायाम के अलावा भी कई ऐसे कारक हैं, जिनपर किसी व्यक्ति का जीवन काल निर्भर करता है. लिहाजा, इस विषय पर अभी और अध्ययनों की आवश्यकता है.

Tags: Health, Yoga

Source : hindi.news18.com