दादी-नानी की कहानी: बहन के घर जा रहे भाई को रास्ते में मिला जहरीला सांप, फिर.. – News18

दीपक पाण्डेय/खरगोन. आज जो कहानी हम आपके साथ साझा कर रहे हैं, उसे सुना रही हैं करीब 75 वर्षीय दादी सावित्री बाई जो निमाड़ अंचल के ग्राम नागझिरी, जिला खरगोन मध्य प्रदेश की रहने वाली हैं. कहानी सुनाते हुए दादी सावित्री कहती हैं कि गांव में एक बुढ़िया रहती थी. उसके तीन बेटे और एक बेटी थी. बेटी की शादी हो चुकी थी.

सावन का महीना आया तो बुढ़िया ने पहले बेटे से कहा कि बहन को विरपोस दे आओ. बेटे ने झट से कह दिया मेरे पास तो कुछ नहीं है, इसलिए मैं तो नहीं जाऊंगा. वह दूसरे बेटे के पास गई तो उसने भी मना कर दिया. आखिर में तीसरे बेटे के पास गई तो उसने कहा- वैसे तो मेरे पास भी कुछ नहीं है पर दोनों भाइयों ने मना कर दिया है तो में बहन को विरपोस देने जाऊंगा.

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सांप से कहा मेरी पगड़ी में बैठ जाओ
बहन के यहां जानें के लिए भाई तैयार हुआ और खाली थैली उठाकर चल दिया. आगे नदी आई तो वहां से गेहूं के बदले 5 मुठ्ठी रेती रख ली. और आगे गया तो खेत मिला, वहां से गुड़ के बदले माटी का ढेला उठा लिया. नारियल के बदले पत्थर रख लिए. कपड़ों के बदले पलास के पत्ते रख लिए. थोड़ी दूर गया ही था की रास्ते में उसे सांप मिल गया. सांप ने कहा की मैं तो आज तुझे काटूंगा. युवक ने मना कर दिया, कहां कि मैं अभी बहन को विरपोस देने जा रहा हूं. सांप नहीं माना बोला- नहीं मैं तो अभी काटूंगा. युवक ने कहां विरपोस देकर जब लौटूंगा तब काट लेना. सांप फिर भी नहीं माना. आखिर में युवक ने सांप से कहां कि तुम मान नहीं रहे है तो मेरी पगड़ी के अंदर बैठ जाओ, जब बहन को विरपोस देकर लौटूंगा तब काट लेना.

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विरपोस माता का चमत्कार
युवक ने सांप को पगड़ी में बिठा लिया. यह देख विरपोस माता टूटमान हुईं और थैली में रखी रेत गेहूं बन गई, माटी का डल्ला गुड़ बन गया, पत्थर नारियल बन गया और पलाश के पत्ते कपड़े बन गए, परंतु इस बात का आभास युवक को भी नहीं हुआ. वह तो बहन के घर पहुंचा. भाई को देख बहन खुशी से खिल गई. बच्चों को कहने लगी- मामा आएं… मामा आएं… भाई घर के अंदर गया. बहन तैयार हो रही थी तो उसने पगड़ी निकाली और ऊपर ऊंचाई पर रख दी ये सोचकर की नीचे रखूंगा तो बहन के बच्चे पगड़ी को हाथ लगाएंगे तो सांप उन्हें काट लेगा.

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सांप के हो गए दो टुकड़े
लेकिन, बच्चे शैतान थे. उन्होंने लकड़ी ली और पगड़ी को नीचे गिरा दिया. विरपोस माता टूटमान (कृपा) हुई तो सांप सोने का बन गया और उसके टुकड़े हो गए. बहन ने देखा तो भाई से कहा-  भाई तुमने क्या सोचा बहन गरीब है तो सब ले लेगी. भाई ने कहां, ”बहन तू मेरी विरपोस को क्या जाने. सब भाई मना कर गए पर मैं कैसे विरपोस लाया ये मैं ही जानू, कहीं से रेत रखी, कहीं से माटी, पत्थर और पत्ते रखकर विरपोस देने आया और रास्ते में ये सांप मिला तो कहने लगा मैं तुझे काटूंगा, नहीं माना तो पगड़ी में बिठाकर साथ ले आया और यहां आकर पगड़ी को ऊपर रख दी थी. लेकिन, वो तो विरपोस माता टूटमान हुईं तो ये सांप सोने का बन गया. बहन अब ये सोने का आधा सांप तू रख और आधा मैं रखता हूं”. यह कहकर भाई अपने घर के लिए वापस रवाना हुआ.

ऐसे ही करें कृपा
अंत में दादी सावित्री कहती हैं कि विरपोस माता जैसे यहां टूटमान हुईं, वैसे ही जब कोई भाई अपनी बहन को विरपोस देने जाए तो सब पर विरपोस माता टूटमान (कृपा बरसे) हों और सब खाएं-पिए और मजा करें. आज की कहानी यहीं समाप्त हुईं. फिर मिलेंगे दादी-नानी की एक और नई कहानी के साथ.

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Source : hindi.news18.com