बद्रीनाथ में तपस्या करना चाहता था लंदन से आया साधु, हसरत रह गई अधूरी – News18

सोनिया मिश्रा/ चमोली. बद्रीनाथ धाम (Badrinath Dham) के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो चुके हैं. यहां आईटीबीपी के जवान सुरक्षा के लिए तैनात हैं. वहीं इस मौसम में यहां साधु-संत भी तपस्या के लिए आते हैं. उन्हें इसके लिए पहले प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ती है. इस बार भी धाम में तपस्या करने के लिए कुल 25 साधुओं ने धाम में रहने की अनुमति मांगी थी, जिनमें 33 साल के लंदन निवासी विदेशी साधु गिरिगोरे निकोलस स्टोएन भी शामिल हैं.निकोलस के गुरु वासुदेवा गिरी बद्रीनाथ धाम में साधनारत हैं. वह भी अपने गुरु के साथ धाम में साधना करना चाहते हैं, इसके लिए उन्होंने 4 दिसंबर को उपजिला मजिस्ट्रेट जोशीमठ को प्रार्थना पत्र दिया था. साथ ही उन्होंने अपना हेल्थ चेकअप भी करवाया, लेकिन इसके बाद भी उन्हें धाम में रहने की अनुमति नहीं मिली.

मिली जानकारी के अनुसार, गिरिगोरे निकोलस स्टोएनको उप जिला मजिस्ट्रेट ने एनओसी के लिए पुलिस के पास भेजा, लेकिन पुलिस ने एनओसी जारी करने से इंकार कर दिया. निकोलस को 21 जुलाई 2023 को टूरिस्ट वीजा जारी हुआ था, जो 19 जुलाई 2024 तक वैध है.

विदेशी साधु को क्यों नहीं मिली अनुमति?
इस संबंध में जब ‘लोकल 18’ संवाददाता ने चमोली की एसपी रेखा यादव से फोन पर बात की, तो उन्होंने बताया कि शीतकाल में बद्रीनाथ धाम की भौगोलिक परिस्थितियां अनुकूल नहीं होती हैं, इसलिए यह क्षेत्र प्रतिबंधित होता है. उन्होंने बताया कि क्योंकि विदेशी साधु टूरिस्ट वीजा पर यहां आया हुआ है और धाम में टूरिस्ट गतिविधियां पूरी तरह से बंद हैं, इसलिए उन्हें तपस्या के लिए एनओसी नहीं दी गई. साथ ही उन्होंने बताया कि बद्रीनाथ धाम में मौजूदा समय में मास्टर प्लान के कार्य भी संचालित हो रहे हैं, जिसमें लगभग 250 मजदूर भी अभी धाम में हैं. साथ ही बद्रीनाथ पुलिस थाना हनुमान चट्टी में स्थापित कर दिया गया है. धाम में पुलिस गश्त बढ़ाई गई है.

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Source : hindi.news18.com