अद्भुत कारीगरी, बुन कर तैयार की गई महेश्वर किले की वॉल हैंगिंग, जानें खासियत – News18

दीपक पाण्डेय/खरगोन. देवी अहिल्या बाई होलकर की राजधानी रहे खरगोन की पर्यटन नगरी महेश्वर में हथकरघा पर बुनकरों द्वारा बनाई जाने वाली माहेश्वरी साड़ियां दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं. यहां के ऐतिहासिक महेश्वर किले की दीवारों पर बनी नक्काशियां बुनकर अपने हाथों से महेश्वरी साड़ियों के बॉर्डर और पल्लू पर उकेरते हैं, लेकिन अब उन्होंने नए-नए प्रयोग शुरू कर दिए हैं.

हाल ही में मास्टर बुनकर मो. आरिफ खान ने एक नवाचार किया है. माहेश्वरी हैंडलूम इंडस्ट्री के इतिहास में पहली बार उन्होंने महेश्वर किले और हाथों में शिवलिंग थामे अहिल्या बाई होलकर की छवि को हथकरघा से वॉल हैंगिंग में उकेरा है. आरिफ की इस अद्भुत कारीगरी को देख हर कोई तारीफ रहा है. इस वॉल हैंगिंग के ग्राफ को तैयार करने में उन्हें तीन महीने लगे. अगस्त में इसकी शुरुआत की थी, जबकि हैंडलूम पर बुनाई में करीब 15 दिन लगे हैं.

ऐसे तैयार हुई अनोखी वॉल हैंगिंग
मास्टर बुनकर ने बताया कि 24 बाई 12 इंच की वॉल हैंगिंग को बनाने के लिए उन्होंने लाल रंग के 2/120 नंबर के मर्सराइज्ड कॉटन का उपयोग ताने और बाने में किया है. 12% चांदी मिक्स जरी इस्तेमाल की गई है. नक्काशी के लिए पीले रंग के धागे का उपयोग किया गया है, जिसको एक-एक करके हाथों से बुना गया है. वॉल हैंगिंग में किले और अहिल्या बाई होलकर की छवि के अलावा महेश्वर फोर्ट, स्वयं का नाम एवं मोबाइल नंबर भी उकेरा है.

इतनी है कीमत
बताया कि महेश्वर किले और अहिल्या बाई की छवि वाले वॉल हैंगिंग फ्रेम की कीमत 22 हजार रुपये है, जबकि जिस साड़ी के लिए उन्हें बुनकर अवार्ड मिला था, वह साड़ी 4500 रुपये की है. उनका दावा है की चाहे साड़ी हो, दुपट्टा हो या हथकरघा पर बनाए गए अन्य प्रोडक्ट उनके जैसा पूरे महेश्वर में कोई नहीं बनाता है.

बुनकर अवार्ड से सम्मानित
बता दें कि आरिफ खान 20 वर्षों से हैंडलूम पर बुनकर का काम कर रहे हैं और हमेशा नई डिजाइन पर फोकस करते हैं, जिसके लिए उन्हें एमपी गवर्मेंट ने संत कबीर दास बुनकर अवार्ड 2017-18 से भी नवाजा है. वह स्वयं के तीन हैंडलूम चलाते हैं. दो पर महेश्वरी साड़ियां बनाते हैं और एक पर नवाचार करते हैं.

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