उज्जैन में निकली खंडोबा मल्हार मार्तंड की शाही सवारी, 300 साल पुरानी है परंपरा – News18

शुभम मरमट/उज्जैन. महाकाल की नगरी में मल्हारी मार्तंड की सवारी धूमधाम से निकाली गई. इस सवारी का इतिहास भी महाकाल की सवारी से जुड़ा है. समाज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनीता पाटिल के अनुसार, 1710 में जब मालवा में मराठा शासन की स्थापना हुई. तभी से सिंधिया राजघराने ने मराठा पद्धति से महाकालेश्वर, काल भैरव और मल्हारी मार्तंड जो 64 भैरवों में से एक हैं, की सवारी निकाली जा रही है.

1920 में बायजाबाई ने चढ़ाया घंटाल
मल्हारी मार्तंड का मंदिर और धर्मशाला मराठाकालीन है. जीर्णोद्धार समय-समय पर होता रहा. 1920 में सिंधिया राजवंश की बायजाबाई ने मंदिर में घंटाल चढ़ाया था, जो आज भी लगा है. पालकी लकड़ी और बांस की थी, जिसे कुछ साल पहले समाजजनों ने बदल कर स्टील की पालकी बनवाई. मल्हारी के चांदी के स्वरूप को पालकी में निकाला जाता है. मल्हारी का पूजन गोपाल मंदिर पर सिंधिया राजवंश द्वारा किया जाता था. आज भी यह परंपरा कायम है. गोपाल मंदिर के पुजारी पूजन करते हैं.

तब बुलावा देने घर-घर जाते थे
25 साल पहले तक यह स्थिति थी कि सवारी का बुलावा देने घर-घर जाना पड़ता था. न कम्युनिकेशन के साधन थे, न यातायात के. खुद ही भाग दौड़ करते थे. फिर भी बहुत ज्यादा लोग नहीं आते थे. केवल पुरुष ही सवारी में निकलते थे. महिलाएं नहीं आती थीं. आज शहर में समाज के हजारों घर हैं.

एक क्विंटल से ज्यादा हल्दी उड़ाई
मल्हारी मार्तण्ड खंडोबा भैरव की शाही सवारी सोमवार शाम 4 बजे मल्हार मार्तंड मंदिर से निकली. सवारी महाकाल, गुदरी होते हुए रामघाट पहुंची, जहां पूजन के बाद पुनः मंदिर पहुंची. सवारी में भक्त हल्दी उड़ाते हुए चले. गोपाल मंदिर पर पालकी का पूजन किया गया. सवारी में एक क्विंटल से ज्यादा हल्दी उड़ाई गयी. सुनीता पाटिल ने बताया कि यह हल्दी जिस पर भी गिरती है वह इसे बहुत शुभ मानता है.

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Source : hindi.news18.com