रमजान में तराबी नमाज पढ़कर मांगे दुआ, 3 दिन से 20 दिन तक का नियम, क्या कहते है – News18

 धीर राजपूत/फिरोजाबाद: रमजान के महीने की शुरुआत हो चुकी हैं और लोग रोजा रखकर, नमाज पढ़कर ऊपर वाले से दुआएं मांग रहे हैं. लेकिन रमजान के महीने में जो लोग पूरे महीने तक रोजा या नमाज नहीं पढ़ सकते उनके लिए तराबी नमाज पढ़ी जाती है. जिसे लोग अपनी सुविधानुसार पढ़ सकते हैं, लेकिन इस नमाज को पढ़ने के लिए लोगों को कुरान कंठस्थ होनी चाहिए. तभी लोग इसे पढ़ सकेंगे और दूसरों को सुना सकेंगे. वहीं यह तराबी नमाज तीन दिन से लेकर 20 दिन तक पढ़ सकते हैं.

फिरोजाबाद के मौलाना ओ.एस चिस्ती ने कहा कि रमजान के महीने में लोग अपने घरों और मस्जिदों में जाकर नमाज पढ़ते हैं. वहीं लोग रोजा भी रखते हैं और ऊपर वाले से अपने गुनाहों की माफी भी मांगते हैं. जिसमें कुछ लोग तीस दिन तक नमाज पढ़ते हैं, तो कुछ लोग तराबी नमाज को पढ़ते हैं. वहीं उन्होंने कहा कि तराबी नमाज हमारे नवी की सुन्नत मानी जाती है. जिसे नवी ने 20 रकात अता की थी. नवी ने कहा था कि लोग दिन में रोजा रखें और रात में अल्लाह ताला की इबादत में 20 रकात नमाज पढें.

नवी की सुन्नत मानी जाती है ये तराबी नमाज
मौलाना ने कहा कि तराबी में सूरत तराबी पढ़ी जाती हैं, जो सिर्फ 10 होती हैं और जिसमें 20 तराबी होती हैं. उसमें कुरान मस्जिद भी पढ़ा जाता है. इसके साथ ही उन्होने बताया कि लोग अपनी दिलचस्पी के हिसाब से इसे पढ़ते हैं. जिन्हें कुरान शरीफ में दिलचस्पी होती है. वह कुरान शरीफ पढ़ते हैं और जिन्हें सूरत में दिलचस्पी होती है वो सूरत पढ़ते हैं.

कंठस्थ होनी चाहिए कुरान
मौलाना ने जानकारी देते हुए बताया कि रमजान मे लोग बाहर कही जाना चाह रहे हैं तो वो लोग तराबी की नमाज पढकर जा सकते हैं. यह नमाज अपनी सुविधानुसार पढ़ी जाती है, जिसमें तीन दिन से लेकर बीस दिन तक लोग कभी भी इसे पढ़ सकते हैं. इसके अलावा तराबी की नमाज वही पढ़ सकता है जिसे कुरान कंठस्थ हो, क्योंकि दूसरे लोगों को भी सुनाने के लिए इसे याद किया जाता है. यह नमाज बिना देखे पढी जाती है.

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Source : hindi.news18.com