पुश्तैनी जमीन बंटवारे की चाभी होती है बेटी के हाथ, अगर नहीं मानी तो फंसेगा पेच – News18

नीरज कुमार/बेगूसराय. यूपी-बिहार में वर्षों से एक कहावत प्रचलित है, “जमीन और जाल में बहुत उलझन होते हैं.” बुजुर्गों का कहना है कि शुरुआती दौर से ही उलझन पर उलझन बढ़ते चली गई. ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट ने इस उलझन को सुलझाने के लिए घर के बंटवारे में बेटियों की भी हिस्सेदारी साझा करना अनिवार्य कर दिया है. ऐसा इसलिए, क्योंकि हमारे देश में संयुक्त परिवार की संस्कृति है. यहां बड़े-बड़े परिवार कई पीढ़ियों से एक साथ ही रहते हैं.

हालांकि, अब धीरे-धीरे वक्त बदल रहा है. बड़े संयुक्त परिवार की जगह छोटी सिंगल फैमिली ही नजर आती है. ऐसे में प्रॉपर्टी को लेकर अक्सर विवाद होता है. खासकर घर की बेटियों का मामला भी गहरा जाता है.

घर की बेटियों की सहमति-पत्र से बन जाएगी आपकी बात
बेगूसराय रजिस्ट्री कार्यालय के कातिब श्रवण साह पिछले 14 साल से भूमि से जुड़े निबंधन कार्य को देख रहे हैं. इन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के नए गाइडलाइंस के तहत सबसे पहले तो जमीन के बंटवारे में वंशावली की जरूरत पड़ती है. वंशावली में घर की बेटियों का नाम नहीं है, तो इस वंशावली के आधार पर भूमि से जुड़ा आपका कोई भी काम नहीं हो सकता है. अगर घर की बेटी जमीन में हिस्सा नहीं लेना चाहे, अपने भाई को ही दे दे तो भी सहमति-पत्र बनवाना अनिवार्य होता है.

वहीं जमींदार कपिलदेव सिंह ने बताया कि हमारे यहां बरसों से एक प्रथा चली आ रही है. इसके तहत बेटियों को उनके हिस्से दहेज के रूप में दे दिए जाते हैं. यही वजह है कि इन्हें जमीन में हिस्सा नहीं दिया जाता है और अक्सर बेटियां मान भी लेती हैं. पहले जमीन के बंटवारे में वंशावली में बेटियों के नाम की जरूरत नहीं होती थी, लेकिन अब अनिवार्य हो गया है.

बेटियों का नाम नहीं, तो रिजेक्ट हो जाएगा वंशावली
चेरिया बरियारपुर प्रखंड के विक्रमपुर पंचायत के मुखिया रमेश सिंह ने बताया कि वंशावली पर साइन करने के दौरान इस बात का ध्यान रखते हैं कि परिवार में बेटियां हैं या नहीं. अब सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइंस के तहत इसकी जांच की जाती है. तब वंशावली पर मोहर और हस्ताक्षर कर इसे वैलिड करते हैं.

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ज्ञात हो कि हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) कानून, 2005 पैतृक संपत्ति में बेटों के साथ ही बेटियों को भी बराबर अधिकार दिया गया है. आपको बता दें कि कानून में संशोधन से पूर्व केवल परिवार के पुरूषों को ही उत्तराधिकारी का दर्जा दिया जाता था.

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Source : hindi.news18.com