आज है आमलकी एकादशी, विष्णु पूजा के समय पढ़ें व्रत कथा, देखें मुहूर्त, पारण समय – News18

हाइलाइट्स

फाल्गुन शुक्ल एकादशी तिथि का प्रारंभ: आज, 12:21 एएम पर हुआ.
विष्णु पूजा का शुभ समय: आज प्रात: 06:25 एएम से.
रवि योग: आज, सुबह 06:25 एएम से रात 10:38 पीएम तक.

आमलकी एकादशी का व्रत आज 20 मार्च दिन बुधवार को है. आज के दिन व्रत रखकर श्रीहरि विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा करते हैं. भगवान विष्णु को भोग में आंवला चढ़ाते हैं और पूजा के समय आमलकी एकादशी की व्रत कथा सुनते हैं. जो भी व्यक्ति विधि विधान से इस व्रत को करता है, उसे भगवान विष्णु की कृपा से 1000 गायों के दान के बराबर पुण्य मिलता है. जीवन के अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है. आमलकी एकादशी का व्रत हर साल फाल्गुन मा​ह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से जानते हैं आमलकी एकादशी की व्रत कथा, पूजा मुहूर्त और पारण समय के बारे में.

आमलकी एकादशी 2024 मुहूर्त

फाल्गुन शुक्ल एकादशी तिथि का प्रारंभ: आज, 12:21 एएम पर हुआ
फाल्गुन शुक्ल एकादशी तिथि का समापन: कल, 02:22 एएम पर होगा
विष्णु पूजा का शुभ समय: आज प्रात: 06:25 एएम से
आमलकी एकादशी व्रत का पारण समय: कल, 01:41 पीएम से 04:07 पीएम के बीच

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योग और नक्षत्र

रवि योग: आज, सुबह 06:25 एएम से रात 10:38 पीएम तक
अतिगण्ड योग: प्रात:काल से 05:01 पीएम तक, फिर सुकर्मा योग होगा.
पुष्य नक्षत्र: आज प्रात:काल से रात 10:38 पीएम तक

आमलकी एकादशी व्रत कथा

एक बार राजा मांधाता ने महर्षि वशिष्ठ से कहा कि आप कोई ऐसी कथा सुनाएं, जिसको सुनकर उनका कल्याण हो. इस पर महर्षि वशिष्ठ ने कहा कि आपको आमलकी एकादशी की व्रत ​कथा सुनाते हैं, जो सभी पापों को नष्ट कर देती है और व्रती को 1000 गायों के दान के बराबर पुण्य फल मिलता है. आमलकी एकादशी की कथा कुछ इस प्रकार है—

एक वैदिश नगर में राजा चैतरथ रहता था. वह काफी पुण्यात्मा और धर्म परायण था. वह भगवान विष्णु का भक्त था. उसके कारण उसकी प्रजा भी भगवान विष्णु की पूजा करती थी. सभी धर्म पुण्य में समय देते थे. यह व्रत फाल्गुन शुक्ल एकादशी रखा जाता है. एक बार इस तिथि पर सभी लोग व्रत थे. सभी ने मंदिर में पूजा पाठ किया, आमलकी एकादशी की कथा सुनी और रात्रि जागरण किया.

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उस दौरान एक शिकारी भी वहां पर मौजूद था. उसने भी आमलकी एकादशी की पूजा, व्रत कथा के श्रवण और जागरण का पुण्य लाभ लिया. वह अगले दिन सुबह घर गया और वहां पर खाना खाकर सो गया. उस दिन ही उसका निधन हो गया. उस शिकारी का जन्म राजा विदूरथ के घर पुत्र के रूप में हुआ, जिसका नाम वसुरथ था.

आमलकी एकादशी व्रत की पूजा में शामिल होने और व्रत ​कथा सुनने के कारण उसे जो पुण्य फल प्राप्त हुआ था, उसके शुभ प्रभाव से वह राजा के पुत्र के रूप में पैदा हुआ. समय व्यतीत होने के साथ ही वह भी एक दिन राजा बन गया. एक दिन वह जंगल में मार्ग भटक गया. वहीं पर वह एक पेड़ के नीचे सो गया. उसी दौरान कुछ लोगों ने उस पर हमला कर दिया, तभी उसके शरीर से एक स्त्री प्रकट हुईं. उन्होंने सभी हमलावरों को मार डाला और राजा की रक्षा की.

राजा की जब आंखें खुली तो वह चौक गया. उसके आसपास काफी लोग मरे पड़े थे. तब उसने कहा कि इस जंगल में उसका हितैषी कौन है? जिसने उसके प्राणों की रक्षा की है? तभी आकाशवाणी हुई कि भगवान विष्णु के अतिरि​क्त तुम्हें कौन बचा सकता है. इस घटना के बाद राजा वापस अपने राज्य लौट आया और सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करने लगा.

महर्षि वशिष्ठ ने राजा मांधाता से कहा कि जो भी व्यक्ति आमलकी एकादशी का व्रत करता है, उसके पाप मिट जाते हैं, वह सभी कार्यों में सफल होता है और अंत में उसे श्रीहरि के चरणों में स्थान मिलता है.

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Source : hindi.news18.com