यूपी के इस शिल्पकार ने कुष्ठ रोगियों को बनाया था आत्मनिर्भर – News18

पीयूष शर्मा/मुरादाबाद: यूपी का मुरादाबाद पूरी दुनिया में पीतल नगरी के नाम से जाना जाता है. यहां के पीतल के उत्पादन देश विदेश में एक्सपोर्ट किया जाते हैं. तो वहीं इन पीतल के उत्पादों पर चार चांद लगाने का काम करते हैं. यहां के शिल्पगुरु, जो अपनी सुंदर-सुंदर नक्काशी से इन्हें और ज्यादा खूबसूरत और आकर्षित बनाते हैं. तो वहीं शिल्पकारी के क्षेत्र में इन दिनों जिले में दो नाम काफी चर्चित है.

पहला नाम दिलशाद हुसैन का है. जिन्हें पदमश्री अवार्ड मिल चुका है. तो वहीं दूसरा नाम है बाबूराम यादव, जिन्हें अब जल्दी ही पद्मश्री अवार्ड मिलने वाला है. बाबूराम यादव ने कड़ी मेहनत कर यहां तक यह मुकाम हांसिल किया है. इसके साथ यह ऐसे शिल्पगुरु है. जिन्होंने नक्काशी के क्षेत्र में कुष्ठ रोगियों को आत्मनिर्भर बनाया था. जो अच्छे से अपना जीवन यापन कर सकते है.

मेहनत और लगन से काम सीखा
शिल्पगुरु बाबूराम यादव ने बताया कि सन 1987 में कुछ ऐसे लोग आए जो हीनता से भरे हुए थे ओर कहने लगे कि हम बेकार है. फिर मैंने उन्हें आश्वासन दिया कि नहीं आप बेकार नहीं हो. आप काम सीखो मैं आपको काम सिखाता हूं. फिर उन्होंने बड़ी मेहनत और लगन से काम सीखा फिर वह 5 साल में इतना काम करने लगे की अपनी अच्छे से मेहनत कर गुजारा करने लगे ओर अब वह बहुत खुश है और अपना कारोबार कर रहे है.

कुष्ठ रोगियों को काम सिखाकर आत्मनिर्भर
अब एक्सपोर्टर ने उन सभी लोगों को काम देना शुरू कर दिया है. मैंने उस समय 8 कुष्ठ रोगियों को काम सिखाकर आत्मनिर्भर बनाया था. मैंने वैसे तो बहुत से लोगों को काम सिखाया है. लेकिन उनमें युवतियां भी शामिल हैं. करीब 600 से 700 लड़कियों को भी मैं काम सिखाया. इसके साथ ही हजार से अधिक लड़कों को भी काम सिखाया है और भारत सरकार की मेरे पास बहुत सारी स्कीम आई थी. जिसकी वजह से मैं बच्चों को बहुत कम सिखाया.

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Source : hindi.news18.com