पिता का सपना पूरा करने के लिए बेटा बना थानेदार…. फिर क्या जीते दर्जनों मेडल – News18

पीयूष शर्मा/मुरादाबाद: जो लोग आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं उनके लिए असफलता, सफलता का ही एक रूप है, जो इनके जीवन में आता है और आएगा ही, बस हमें इसका सामना करने के लिए पहले से तैयार रहने की जरूरत है. यूपी के मुरादाबाद में एक ऐसे शख्स है जिनका नाम डॉ.राकेश चक्र है. जिन्होंने अपने पिता का और अपना दोनों का सपना पूरा कर दर्जनों मेडल हासिल कर लिए. इसके साथ ही अब उन्हें दिन प्रतिदिन किसी न किसी अवार्ड से नवाजा जाता रहता है.

डॉ. राकेश चक्र के पिता चाहते थे कि वह कोतवाल बने और डॉक्टर राकेश चक्र चाहते थे कि वह लेखक बने, फिर डॉक्टर राकेश चक्र ने अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए यूपी पुलिस ज्वाइन की जिसमें वह कोतवाल बने और कोतवाल के बाद उन्होंने अपना ट्रांसफर इंटेलिजेंस में कर लिया. इसके बाद उन्होंने पुस्तक लिखनी शुरू कर दी और अब तक उन्होंने करीब 144 पुस्तक लिख दी हैं. जिसमें से कई किताबें स्कूलों में पढ़ाई भी जाती हैं. जिसको लेकर अब तक उन्हें दर्जनों से अधिक बड़े से बड़े पुरस्कार मिल चुके हैं.

सेवानिवृत हो चुके हैं डॉ. राकेश चक्र
डॉ. राकेश चक्र ने बताया कि इंटेलिजेंस विभाग से सेवानिवृत्त हुए करीब 10 साल हो गया है. उन्होंने बताया कि जब वह इंटरमीडिएट में थे तब से लिखते चले आ रहे हैं. यह उनका शोक बहुत पुराना शोक है. उनके पिताजी चाहते थे कि उनका बेटा थानेदार बने और वह चाहता थे कि वह शिक्षक बने, फिर उनकी इच्छाओं को पूरा करने के लिए वह पुलिस में भर्ती हुआ और थानेदार उप निरीक्षक बन गया है. वह 1981 में भर्ती हुए थे. 1982, 83 में ट्रेनिंग ली थी. वह मूलतः बरेली का रहने वाले हैं. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि उनकी बुक्स 1998 से लगातार प्रकाशित हो रही है. उन्होंने बताया कि वह तब से अब तक करीब 144 पुस्तक लिख चुके हैं. उनकी पुस्तकों में कंटेंट गजलें गीत कहानी उपन्यास बच्चों के लिए कहानी गीत सहित आदि कंटेंट की पुस्तक लिखते हैं. कई विद्यालयों में उनकी पुस्तक को स्कूल की सेलेब्स में पढ़ाई जाती है.

कई दर्जन पुरस्कारों से हो चुके हैं सम्मानित
उन्होंने बताया कि उन्हें अब तक 7 दर्जन के करीब पुरस्कार मिल चुके हैं. जो सभी बड़े लेवल के पुरस्कार हैं. इसके साथ ही हाल ही में उन्हें उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ की तरफ से पुरस्कार मिला है. यह प्रताप नारायण के नाम से जाना जाता है . उन्होंने बताया कि उन्हें पैसों के रूप में भी बहुत सारे पुरस्कार मिल चुके हैं. उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की तरफ से सर्वोच्च पुरस्कार मिला है. जिसने ढाई लाख की धनराशि शामिल है. भारत सरकार से बाल साहित्य मिला था. जिसमें डेढ़ लाख की धनराशि शामिल थी. बाकी बहुत पुरस्कार मिले हैं.

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Source : hindi.news18.com