नामांकन के लिए नहीं थे पैसे तो बेच दी पत्नी के कान की बाली, तीन बार बने सांसद – News18

कुंदन कुमार/गया : पूरे देश में लोकसभा चुनाव की तैयारी चल रही है. उम्मीदवारों की घोषणा भी हो गई है. कई उम्मीदवार ऐसे होते हैं जो चुनाव में करोड़ों रुपये खर्च करते हैं. लेकिन आज हम एक ऐसे सांसद की कहानी बताने जा रहे हैं जो चुनाव में धन के बल पर नहीं बल्कि अपनी साफ छवि को लेकर चुनाव मैदान में जाते थे. उन्हें तीन बार सांसद बनने का अवसर मिला.

हम बात कर रहे हैं बिहार के गया लोकसभा सीट के पूर्व सांसद ईश्वर चौधरी की. ईश्वर चौधरी ऐसे सांसद थे जिनकी कहानी किसी को भी भावुक कर देती है. उन्हें कार्यकर्ताओं ने चंदा करके चुनाव लड़वाया और तीन बार जितवाया भी. उन्होंने बिहार के कद्दावर नेता जगजीवन राम के बेटे को हराकर संसद भवन तक पहुंचे.

नामांकन के लिए भी नहीं थे पैसे
गया सीट से 1971 में एक तरफ बिहार के कद्दावर नेता जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम कांग्रेस के टिकट पर उम्मीदवार थे, तो दूसरी ओर जनसंघ की टिकट पर ईश्वर चौधरी. सुरेश राम की शानोशौकत के सामने ईश्वर चौधरी की रंगत बेहद फीकी थी. जहां सुरेश राम के पास चुनाव प्रचार के लिए गाड़ियों का बड़ा काफिला था.

वहीं ईश्वर चौधरी के पास गाड़ी तो बहुत दूर की बात नामांकन भरने के लिए भी पैसे नहीं थे. तब उन्होंने पत्नी की कान बाली बेच दी. इतना ही नहीं उनके पास पैसे रहने के बावजूद चुनाव लड़ा और लोगों ने चंदा देकर उन्हें जितवाया. कहा जाता है ईश्वर चौधरी ऐसे सांसद थे जिन्हें तीन बार क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला लेकिन उन्होंने एक भी बाॅडी गार्ड नहीं रखा.

तीन बार रहें सांसद, इनको हराया
1971 में जनसंघ के टिकट पर उन्होंने चुनाव लड़ा और भारी वोट से चुनाव जीते. चुनाव जीतने के बाद इन्होंने सरल और विनम्र स्वभाव से जनता का दिल जीत लिया. फिर 1977 में जब जनसंघ का जनता पार्टी के साथ विलय हो गया तो इन्हें फिर टिकट मिला और इन्होंने कांग्रेस के मिश्री सदा को हराया. तीसरी बार 1989 में भाजपा की टिकट से इन्होंने चुनाव लड़ा और अच्छे वोट से जीता. लेकिन सरकार गिरने के कारण 1991 में मध्यवर्ती चुनाव हुआ और चुनाव प्रचार प्रसार के दौरान गया के कोंच में उनकी हत्या कर दी गई. अपने कार्यकाल के दौरान इन्होंने जनता में गहरी पैठ बना ली थी, जिस कारण विरोधी इनके सामने टिक नहीं पाते थे.

इनके नाम से एक रेलवे स्टेशन भी
ईश्वर चौधरी गया लोकसभा सीट के ऐसे सांसद रहें, जिन्हें जनता भी भरपूर सपोर्ट करती थी. गया में आज इनके नाम से एक रेलवे स्टेशन भी है. गया और मानपुर जंक्शन के बीच शहीद ईश्वर चौधरी हाल्ट है, जहां पैसेंजर ट्रेन रुकती है. उनके बारे में अधिक जानकारी देते हुए उनके भतीजे प्रमोद चौधरी बताते हैं वह एक ऐसे नेता थे, जो जनता के सपोर्ट से सांसद बनें. उनके पास चुनाव लड़ने के लिए पैसा नहीं होता था, तो जनता ही उन्हें चंदा देकर चुनाव लड़वाते थे. उनका बैकग्राउंड बेहद कमजोर था, लेकिन जनसंघ से जुड़े रहने के कारण पार्टी ने उनपर भरोसा जताया और अपनी पत्नी का जेवर बेचकर चुनाव लड़े.

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Source : hindi.news18.com