भीलवाड़ा के बाजारों में सजे खास शीतला पूजन के पकवान, कीमत न के बराबर – News18

रवि पायक/भीलवाड़ा: शीतला सप्तमी का पर्व नजदीक आ गया हैं. इस दिन हर कोई गुलाल के रंग में नजर आता हैं, शहरवासी रंग व गुलाल से होली खेल रंगोत्सव मनाएंगे. इसको लेकर बाजारों में रौनक परवान चढ़ गए हैं. भीलवाड़ा शहर के बाजार भी सज चुके हैं और लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं पर्व के एक दिन पहले घरों में कई खास तरह के पकवान बनाए जाते हैं और विभिन्न तलीय व्यंजन, पापड़-पापड़ी व दही चावल का ओलिया बनाया जाएगा. शीतला सप्तमी पर्व को लेकर मिठाई एवं नमकीन तलीय व्यंजनों के बाजार में दिखाई दे रहे हैं भीलवाड़ा शहर में सबसे अधिक आइटम लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं.

तलीय व्यंजनों के व्यापारी थावर दास राम सिंघानी कहते हैं कि शीतला सप्तमी को लेकर भीलवाड़ा शहर के बाजार सज चुके हैं, इसके एक दिन पहले रांदा पौआ किया जाता हैं. इसको देखते हुए भीलवाड़ा के बाजार में 100 से अधिक तलीय व्यंजनों आए हुए हैं. जिनकी लोग खरीदारी कर रहे हैं और शीतला सप्तमी को लेकर बाजार में खरीदारी को लेकर अच्छा रुझान देखा जा रहा है जिसके वजह से व्यापारी देर रात तक फ्री हो पा रहा है. वहीं अगर इनकी कीमत की बात की जाए तो इनकी कीमत भी 10 से शुरू होकर 100 रुपए की है जिन्हें हर कोई खरीद रहा है.

10 दिन तक खराब नहीं होते यह व्यंजन
वहीं दूसरी तरफ खरीदार सांवरलाल प्रजापत ने कहा कि शीतला सप्तमी पर विशेष तौर पर शीतला माता को बसौड़ा व्यंजनों का भोग लगाया जाता है. इस दिन होली खेली जाती है उसे दिन जब मेहमान घर पर आते हैं तो उन्हें तलीय व्यंजनों खाने के लिए दिए जाते हैं. यह व्यंजन करीब 10 दिन तक खराब नहीं होते हैं इस त्यौहार का हर किसी को पूरे साल भर इंतजार रहता है 12 महीने में यह त्यौहार एक बार आता है और इस दिन सब होली खेलते हैं यह एक महत्वपूर्ण त्यौहार है इसलिए हम खरीदारी करने के लिए आए हैं.

बासौड़ा पूजते समय इन बातों का रखे ख्याल
माता शीतला को हमेशा ठंडे खाने का भोग ही लगाया जाता है. माता शीतला की पूजा करते समय दीया, धूप या अगरबत्ती नहीं जलानी चाहिए. शीतला माता की पूजा में अग्नि को किसी भी तरह से शामिल नहीं किया जाता है मंदिर या होलिका दहन स्थल पर पूजा करने के बाद अपने घर में आकर प्रवेश द्वार के बाहर स्वास्तिक जरूर बनाएं.

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Source : hindi.news18.com