टिकट कटा तो बागी हुए BJP के दो सांसद, कांग्रेस के संपर्क में, मिल सकता है मौका – News18

पटना. पुरानी कहावत है कि दुश्मन के दुश्मन को भाई बनते देर नहीं लगी. बात अगर राजनीति की हो तो यह बात और सटीक हो जाती है. यही स्थिति इस बार लोकसभा चुनाव के दौरान बिहार में दिखाई पड़ रही है. लोकसभा के 2024 के चुनाव में बीजेपी ने कई पुराने चेहरों पर ही भरोसा जताया है वही कई ऐसे चेहरे है जिन्हे इस बार टिकट से बेदखल कर चुनावी मैदान से बाहर कर दिया है. बीजेपी से टिकट नहीं मिलने के कारण बीजेपी के ये सांसद कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं. बीजेपी से नाता तोड़क पाला बदलने और कांग्रेस में शामिल होने की रेस में बीजेपी के दो सांसदों के नाम चर्चा में बन हुआ है.

माना जा रहा है कि सासाराम के बीजेपी सांसद छेदी पासवान जिन्हें इस बार टिकट नहीं दिया गया है वो कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं, वहीं मुजफ्फरपुर के बीजेपी सांसद अजय निषाद के भी कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा बिहार की सियासत में बनी हुई है. सूत्र बताते हैं कि दोनो को कांग्रेस सासाराम और मुजफ्फरपुर से टिकट दे सकती है.

फेसबुक से हटाया मोदी का परिवार

अजय निषाद में फेसबुक से मोदी परिवार के साथ बीजेपी का नाम भी हटा लिया है. मुजफ्फरपुर के सांसद अजय निषाद को टिकट कटने के बाद अजय निषाद पार्टी से बेहद खफा हैं और यही कारण है कि बीजेपी को छोड़ कांग्रेस में शामिल होने की रेस में हैं. छेदी पासवान और अजय निषाद के नाराजगी की वजह. बीजेपी की लोकसभा चुनाव को लेकर पांचवी लिस्ट है, जिसे जारी करते हुए पार्टी ने 111 लोकसभा उम्मीदवारों की घोषणा की थी. इसमें बिहार के कई पुराने चेहरों को बदलते हुए नए चेहरों को मौका दिया है.

बेटिकट छेदी भी नाराज

सासाराम के बीजेपी सांसद छेदी पासवान को हटाकर शिवेश कुमार राम को टिकट दिया गया है. शिवेश कुमार राम इससे पहले अगिआंव विधानसभा से बीजेपी से विधायक रह चुके हैं. शिवेश राम के पिता मुनिलाल राम भी सासाराम से सांसद रह चुके हैं, वहीं मुजफ्फरपुर के बीजेपी सांसद अजय निषाद का भी बीजेपी ने टिकट काटकर राजभूषण चौधरी को टिकट दिया है. छेदी पासवान के टिकट कटने की बड़ी वजह उनकी क्षेत्र में आसक्रियता, लोगों के बीच नाराजगी और सासाराम लोकसभा सीट पर एंटी ईंकंबैंसी रही है.

टिकट कटने की वजह

छेदी पासवान अब तक 1989, 2014 और 2019 में तीन बार सांसद रहा चुके हैं. जानकारी के मुताबिक बीजेपी द्वारा उम्मीदवारों को लेकर आंतरिक सर्वे कराया गया था जिसमें छेदी पासवान की स्थिति अच्छी नहीं बताई गई, जिसके बाद उनका टिकट कटा. यही हाल मुजफ्फरपुर के सांसद अजय निषाद की रही. अजय निषाद की छवि जनता के बीच लगातार अलोकप्रिय होता जा रहा था. मुजफ्फरपुर में कोई नया बड़ा काम नही होना, रिंग रोड प्रस्ताव का केंद्र से रोक और आंतरिक सर्वे में पिछड़ना मुख्य वजह रही है.

अजय निषाद और राजभूषण के बीच दिलचस्प तस्वीर

बीजेपी द्वारा अजय निषाद का टिकट काटकर राजभुषण चौधरी को टिकट देना लोगों के लिए चौंकाने वाला रहा. राजभूषण चौधरी अजय निषाद से काफी छोटे हैं, बावजूद बीजेपी ने राजभूषण को मौका दिया है. आज से दो साल पहले ही राजभूषण निषाद को बीजेपी में शामिल कराने के लिए अजय निषाद की बड़ी भूमिका मानी जाती है. राजभूषण दो साल पहले तक मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी के प्रमुख चेहरे थे. बोचहा विधानसभा के उपचुनाव में मुकेश सहनी को कमजोर करने के किए राजभूषण निषाद को 2022 में भाजपा में लाया गया था, जिसे अजय निषाद ने ही लाया था. 2014 के लोकसभा चुनाव में अजय निषाद ने राजभूषाण चौधरी को 4 लाख से ज्यादा वोट के अंतर से हराया था.

कांग्रेस उम्मीदवारों की बेचैनी बढ़ी

छेदी पासवान और अजय निषाद के बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा को लेकर कांग्रेस के स्थानीय और संभावित उम्मीदवारों की बेचैनी बढ़ गई है. मुजफ्फरपुर से कांग्रेस के विधायक विजेंद्र चौधरी कांग्रेस के टिकट के प्रबल दावेदार हैं. अगर राजभूषण चौधरी को टिकट मिलता है तो विजेंद्र चौधरी की नाराजगी बढ़ सकती है और निषाद वोट बैंक में सेंध लगने की संभावना है. वही हाल सासाराम लोकसभा सीट का है. सासाराम सीट से मीरा कुमार चुनाव लड़ती रही हैं पर इस बार वहां से मीरा कुमार के पुत्र के टिकट मिलने की संभावना जताई जा रही है. अगर मीरा कुमार के पुत्र कि जगह छेदी पासवान जो हमेशा विरोधी रहे हैं को टिकट मिलता है तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं की नाराजगी बढ़नी तय है.

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Source : hindi.news18.com