400 एकड़ में 3 लाख पौधे, हर तरफ लाल ही लाल, गर्मी में स्वर्ग सा नजारा – News18

पलामू. गर्मी छूटी होने से पहले लोग छुट्टियां मनाने के लिए जगह की तलाश करने लगते हैं. इस दौरान पर्यटकों को पलामू भी अपनी ओर आकर्षित करता है. झारखंड का यह जिला प्राकृतिक खूबसूरती से परिपूर्ण है. बता दें कि जिले के नाम में ही इसकी खासियत छिपी है. अगर आप गर्मी छुट्टी में घूमने के लिए पलामू आना चाहते हैं तो इसकी खूबसूरती और प्राकृतिक धरोहर के बारे में जान लीजिए.

झारखंड की राजधानी रांची से 165 किलोमीटर दूर पलामू अपनी संस्कृति और प्राकृतिक दृश्यों के लिए विख्यात है. यही वो जिला है जहां क्षेत्रफल की दृष्टि से एशिया का दूसरा सबसे बड़ा लाह बगान है. बता दें कि यहां 421 एकड़ के क्षेत्रफल में तीन लाख से अधिक पलाश के पेड़ हैं. होली आते ही पलाश के पत्ते झड़ जाते हैं और इसके फूल खिल उठते हैं. इसके बाद यहां का नजारा बदल जाता है. पर्यटन के लिहाज से भी ये जगह बेहद खास हो जाती है. फॉरेस्ट फायर के नाम से विख्यात पलाश के इन्हीं लाखों पौधों के बीच आप शाम गुजार सकते हैं.

पर्यावरणविद डॉ. डीएस श्रीवास्तव ने लोकल18 को बताया कि वसंत ऋतु में पलाश के फूल खिलते हैं. जब पत्ते झड़ जाते हैं तो ये फूल जंगल की आग की तरह दिखने लगते हैं. इसीलिए इसे फॉरेस्ट फायर भी कहा जाता है. पलामू में एशिया का दूसरा सबसे बड़ा कुंदरी लाह बगान कभी लाह उत्पादन में अग्रणी था. यह झारखंड में इकलौता ऐसा बगान है, जहां एक साथ इतने सारे पलाश के पेड़ देखने को मिलते हैं. उन्होंने बताया कि पर्यटकों के लिए ये बेहद आकर्षक जगह है.

प्रकृति की देन है पलाश
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि पलाश हर जगह नहीं होता. इसके लिए खास तरह की मिट्टी ब्लैक कॉटन सॉइल की जरूरत होती है. गर्मी के मौसम में इसके बीज जमीन के अंदर चले जाते हैं, जिसके बाद पौधे निकलते हैं. यह किसी नर्सरी में नहीं होता. न ही इसे निकालकर कहीं और लगाया जा सकता है. ये प्रकृति की देन है. पलामू में सिर्फ कुंदरी लाह बगान में एक साथ इतने सारे पलाश देखने को मिलते हैं

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Source : hindi.news18.com