चावल वो भी 'काला नमक' वाला, यूपी के किसानों की किस्मत का खुल जाएगा ताला – News18

लखनऊ. सरकार ने छह निर्दिष्ट सीमा शुल्क केंद्रों के माध्यम से 1,000 टन तक काला नमक चावल की किस्म के निर्यात पर शुल्क हटा दिया है. अभी तक काला नमक चावल के निर्यात पर 20 प्रतिशत शुल्क लागू था. वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, चावल की इस किस्म के 1,000 टन तक के निर्यात पर शुल्क छूट बुधवार से प्रभावी होगी.

विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने मंगलवार को निर्दिष्ट सीमा शुल्क केंद्रों के माध्यम से 1,000 टन तक काला नमक चावल के निर्यात की अनुमति दी थी. काला नमक गैर-बासमती चावल की एक किस्म है, जिसके निर्यात पर पहले प्रतिबंध था. चावल की इस किस्म के निर्यात को छह सीमा शुल्क केंद्रों के माध्यम से अनुमति दी गई है. ये केंद्र वाराणसी एयर कार्गो; जेएनसीएच (जवाहरलाल नेहरू कस्टम्स हाउस), महाराष्ट्र; सीएच (कस्टम हाउस) कांडला, गुजरात; एलसीएस (भूमि सीमा शुल्क स्टेशन) नेपालगंज रोड; एलसीएस सोनौली; एवं एलसीएस बरहनी हैं.

यह भी पढ़ेः ‘योगी सरकार में यूपी से पलायन कर रहे गुंडे’ गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर भी जमकर साधा निशाना

भारत का काला नमक चावल जिन देशों में भेजा जाएगा उनमें भूटान, मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कैमरून, कोटे डी आइवर, गिनी, मलेशिया, फिलीपींस और सेशेल्स शामिल हैं. इन देशों के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने गैर बासमती सफेद चावल और काला नमक चावल का निर्यात कोटा तय किया है.

उत्तर प्रदेश में काला नमक चावल का उत्पादन किया जाता है. यह बेहद स्वादिष्ट और खुशबूदार होता है. ऐसे में यह देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोगों को खूब भाता है. काला नमक चावल पूर्वी उत्‍तर प्रदेश के 11 जिलों में ही पाया जाता है, जिसमें बस्ती, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर, बलरामपुर, गोंडा ,गोरखपुर, श्रावस्‍ती, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया,बहराइच शामिल हैं. जो यही की जलवाऊ और मिट्टी में ही पैदा होता है. इसे भगवान बुद्ध का प्रसाद माना जाता है. अब इसकी डिमांड को देखते हुए केंद्र सरकार ने काला नमक चावल के निर्यात को मंजूरी दी है. इसके तहत अब चुंनिदा कस्टम स्टेशन से निर्यात शुरू हो होगा.

Tags: Kisan, UP news

Source : hindi.news18.com