बाढ़ में लाखों का हुआ नुकसान, नहीं मानी हार.. दोबारा शुरू कर दिया कारोबार… – News18

कुंदन कुमार/गया. मधुमक्खी पालन एक ऐसा व्यवसाय है, जो किसानों की आमदनी को दोगुनी कर सकता है. बिहार के गया जिले में भी कई ऐसे किसान हैं, जो मधुमक्खी पालन के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं. इससे उनकी जिंदगी में खुशहाली आई है. आज हम बात कर रहे हैं परैया प्रखंड क्षेत्र के झिकटिया गांव के रहने वाले रविंद्र कुमार की. साल 2014-15 में उत्तर बिहार में आई बाढ़ में उनके सभी मधुमक्खी बॉक्स नदी में बह गए थे. बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और एक बार फिर जीरो से शुरुआत की. इस साल 20 मधुमक्खी बॉक्स से इस व्यवसाय को शुरू किए हैं. साल का 7 से 8 क्विंटल शहद तैयार होने की उम्मीद है.

लगभग 10 साल पहले उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र मानपुर से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण लेकर इस व्यवसाय को शुरू किया था. अच्छा काम चल रहा था. साल 2015 की जून-जुलाई में मधुमक्खी बॉक्स को लेकर वे उत्तर बिहार के जिले में गए थे. तभी अचानक आई बाढ़ के कारण नदी किनारे लगे मधुमक्खी बॉक्स नदी में बह गए. इससे उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ. इस नुकसान के बाद एक बार फिर उन्होंने मधुमक्खी पालन करने की सोची और काम में जुट गए. 75% सब्सिडी पर उद्यान विभाग से उन्हें 20 मधुमक्खी बॉक्स मिले हैं. अभी परैया रोड के झिकटिया गांव में खेत किनारे बॉक्स लगाकर शहद तैयार कर रहे हैं.

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एक बॉक्स से 40 किलो तक शहद होता है तैयार
रवींद्र बताते हैं कि एक बॉक्स से सालाना 30 से 40 किलो शहद तैयार हो जाता है. इस तरह 20 बॉक्स से 7 से 8 क्विंटल शहद तैयार होगा. वे कहते हैं कि गर्मी के दिनों में फूल की कमी होने के कारण थोड़ी परेशानी होती है. इस दौरान मधुमक्खियों को चीनी का घोल भी पिलाया जाता है. वे बताते हैं कि फिलहाल मार्केट में 200-300 रुपये प्रति किलो तक शहद का रेट मिल जाते हैं. कई लोग ऐसे हैं, जो उनके घर से ही शहद खरीद लेते हैं. अगर आप भी इनका शहद खरीदना चाहते हैं तो उनके मोबाइल 9334938386 पर संपर्क कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि जो लोग मधुमक्खी पालन करना चाहते हैं, वे कम से कम एक साल तक दूसरे के साथ रहकर पूरी तरह सीख लें.

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