शगुन देखकर चाल चलने वाला लालसिंह गिरफ्तार, 23 साल से था फरार – News18

मनमोहन सेजू/बाड़मेर. कभी देश की सेना में जाने का सपना संजोने वाला युवा अपने मामा की ही हत्या कर बैठा. हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. सजा के दौरान पैरोल से ऐसा फरार हुआ कि उसे गिरफ्तार करने में पुलिस को 23 साल लग गए. पुलिस ने लालसिंह की गिरफ्तारी के बारे में बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस की और बताया कि उसे काफी जद्दोजहद के बाद गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी के पास से काफी हथियार भी बरामद हुए. इस दौरान उसका एक साथी भी गिरफ्तार कर लिया गया.

शगुन देखकर काम करता था आरोपी
शगुन देखकर काम करने वाले लालसिंह को जब पुलिस ने पकड़ा तो उसका कहना था कि आज शगुन अच्छे नही थे नहीं तो उसके पास इतने अत्याधुनिक हथियार थे कि जिससे वह पुलिस का 2 दिन तक बड़े आराम से मुकाबला कर सकता था. दरअसल, 2 जून 1994 को बाड़मेर शहर के तिलक बस स्टैड के पास हरलाल सियाग की गोली मारकर हत्या करने के बाद लालसिंह उर्फ लुणसिंह को गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन साल 2001 में पैरोल से वह फरार हो गया. 68 हजार रुपये का इनामी लालसिंह इतना शातिर था कि वह पुलिस व सेना के पास होने वाले हथियारों की खरीद फरोख्त करने लग गया और उत्तरप्रदेश, गुजरात सहित अन्य राज्यो की गैंग के साथ मिलकर अवैध हथियारों, बारूद का लेनदेन करने लग गया.

भारी मात्रा में बरामद हुए अवैध हथियार
बाड़मेर पुलिस को भी लालसिंह को पकड़ने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी है. कई बार पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी भाग जाता था. वह पैरोल के बाद अपने परिवार के साथ रहता था. पुलिस ने लालसिंह को बाड़मेर जिले के बिशाला के पास से भारी मात्रा में अवैध हथियारों, बारूद के साथ गिरफ्तार किया है. बाड़मेर पुलिस के साथ साथ जोधपुर रेंज आईजी की विशेष टीम ने इस कार्यवाही को अंजाम दिया है.

जोधपुर रेंज आईजी विकास कुमार का कहना है कि लालसिंह राजसी जीवन जीता था. साल 2001 में पैरोल से फरार चल रहा था. फरारी के दौरान बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, बालोतरा और आसपास के 1 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में रह रहा था. फरारी के बाद ही उसने शादी रचाई और राजसी जीवन जीता था. आईजी विकास कुमार के मुताबिक लालसिंह का दावा है कि वह अकेले बारूद, हथियारों के दम पर दो दिन बाड़मेर पुलिस का मुकाबला कर सकता है.

इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि लालसिंह के कब्जे से एक लाख रुपये नकद, रायफल, पिस्टल और 300 से अधिक कारतूस के साथ साथ बारूद भी मिला है. सबसे बड़ी बात यह है कि यह राइफल और पिस्टल महज सेना और पुलिस के पास ही होती है. विकास कुमार के मुताबिक वह शगुन पर बड़ा विश्वास करता था.

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Source : hindi.news18.com