पब्जी नहीं, इस इलाके के युवा खेलते हैं कुश्ती; हर सप्ताह उमड़ती है भीड़ – News18

देहरादून: आज के वक्त में लोग कम्प्यूटर और इंटरनेट को ही मनोरंजन का एकमात्र साधन मानने लगे हैं. तो वहीं क्रिकेट, फुटबॉल जैसे लोकप्रिय खेलों को लोग तवज्जो देते हैं. एक जमाने में इलाकों की शान बढ़ाने वाला कुश्ती अब कहीं विलुप्त सा हो चला है. महाभारत काल का मल्लयुद्ध यानी कुश्ती को आज का युवा कम ही जानता है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके कुछ मैच होते हैं. लेकिन छोटे गांवों और शहरों में जिस तरह अखाड़े में पहलवानों के दंगल देखने को मिलते थे, वह अब गिनती के रह गए.

राजधानी देहरादून की अखाड़ा शेरान समिति साप्ताहिक दंगल करवाती है, जिसमें अलग- अलग इलाकों से पहलवान पहुंचते हैं. पिछले 60 सालों से समिति इस आयोजन को करवा रही है. ताकि, युवा पीढ़ी इस खेल से प्रेरित हो और अनुशासन में रहकर नशे से दूरी बनाए.

विलुप्त हो रहे कुश्ती के आयोजन
देहरादून की अखाड़ा शेरान समिति के अध्यक्ष तिलकराज ने बताया कि उनकी समिति देहरादून के परेड मैदान में पिछले 60 सालों से कुश्ती दंगल का आयोजन हर सप्ताह करवा रही है. क्योंकि, कुश्ती हमारा भारतीय पारंपरिक खेल है. इसके प्रति स्थानीय युवा रुचि दिखाए और जो युवा पीढ़ी नशे के अंधेरे में खिंची चली जा रही है. वह पहलवानों को देखकर प्रेरित हो सके. उन्होंने बताया कि हर रविवार को साप्ताहिक दंगल का आयोजन किया जाता है, जिसमें उत्तराखंड के अलावा अन्य प्रदेशों के पहलवान भी हिस्सा लेते हैं. इनमें छोटे बच्चे भी हैं.

सरकार से सहयोग की उम्मीद
तिलकराज बताते हैं कि उनके पास नेशनल लेवल के कोच हैं, जो लोगों को ट्रेनिंग देते हैं. इनमें 10 वर्ष से लेकर 40 वर्षों तक के लोग होते हैं. उन्होंने कहा कि हम तो कोशिश करते हैं कि पहलवानों को प्रोत्साहन मिले. लेकिन सरकार से अगर इसमें सहयोग मिल जाता, तो हम और बेहतर कर पाते.

फिटनेस के लिए जरूरी है कुश्ती
वहीं, पहलवान संदीप नेगी बताते हैं कि अपनी फिटनेस के लिए पहले से ही वह काम कर रहे थे. आईटीबीपी में खेल कोटा से उनकी भर्ती हुई. वह कुश्ती में उत्तराखंड केसरी होने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के मेडलिस्ट रहे हैं. वह कहते हैं कि हरियाणा और पंजाब की तरह उत्तराखंड में भी जस खेल को बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए. उनका कहना है कि नए जमाने के लोग क्रिकेट आदि की तरफ रुझान रखते हैं. लेकिन, रेसलिंग की तरफ कोई नहीं आता है. जबकि इसमें फिटनेस के लिए प्रेरणा मिलती है.

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