तीसरे चरण में भी गिरा वोटर टर्नआउट, फिर क्यों राहत की सांस लेगा चुनाव आयोग? – News18

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के लिए 93 सीटों पर मंगलवार को तीसरे चरण का मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया. इस दौरान करीब 64.5% वोटिंग दर्ज की गई. इससे पहले वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में 66% मतदान रिकॉर्ड किया गया था. यहां पहले दो चरणों की तरह, तीसरे दौर में भी 2019 की तुलना में कम मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया, लेकिन अंतर काफी कम हो गया.

तीसरे चरण के समापन के साथ अब 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 283 संसदीय क्षेत्रों में मतदान समाप्त हो गया है. चुनाव विश्लेषकों का कहना है कि तीनों चरणों में यूपी और बिहार में मतदान प्रतिशत सबसे कम रहा. हालांकि तीसरे चरण में छत्तीसगढ़, कर्नाटक और गोवा में मतदान प्रतिशत में वृद्धि देखी गई. इसे चुनाव आयोग के लिए थोड़ी राहत की बात मानी जा रही है.

वर्ष 2019 के आंकड़ों में असम की चार सीटों का डेटा शामिल नहीं है, जहां परिसीमन किया गया है. चुनाव आयोग के वोटर टर्नआउट ऐप पर रात 11.45 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, इस चरण में असम में 81.7% के साथ सबसे अधिक मतदान हुआ. सबसे कम उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर मतदान हुआ, जहां 2019 में 60% के मुकाबले 57.3% मतदान हुआ. इसके बाद बिहार (58.2%) और गुजरात (59.2%) का स्थान रहा. गुजरात में सूरत को छोड़कर सभी सीटों पर मतदान हुआ. सूरत सीट पर बीजेपी के उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए. जबकि पश्चिम बंगाल की चार सीटों पर 75.8% मतदान हुआ, यह पांच साल पहले हुए 81.7% से बहुत कम था.

ईसी ने कहा, ‘हालांकि मतदान शाम 6 बजे तक था, लेकिन कई मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को कतार में देखा गया. कुछ क्षेत्रों में गर्म मौसम की स्थिति का सामना करते हुए, मतदाताओं ने अपने मतदान केंद्रों पर वोट डालने के लिए उत्साहपूर्वक भाग लिया.’ इसमें कहा गया कि मतदान सुचारु और शांतिपूर्ण रहा. तीन चरणों में पूरे उत्तर-पूर्व, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों को कवर किया गया.

तीसरे चरण से शुरू करते हुए मतदान पैनल ने मतदाताओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए प्रमुख दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के समर्थन से, राष्ट्रीय और राज्य आइकनों से SMS अलर्ट, वॉट्सएप संदेश और वॉयस कॉल की एक प्रणाली शुरू की है.

चुनाव आयोग ने कहा कि डेटा को फील्ड-स्तरीय अधिकारियों द्वारा अपडेट किया जाएगा, क्योंकि मतदान दल लौटते रहेंगे और वीटीआर ऐप पर पीसी-वार लाइव उपलब्ध रहेंगे. आयोग ने कहा, ‘निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, मतदान दिवस के एक दिन बाद उम्मीदवारों या उनके अधिकृत पोलिंग एजेंटों की मौजूदगी में चुनाव पत्रों की जांच की जाती है. पुनर्मतदान कराने का निर्णय, अगर कोई हो तो, भी उसके बाद लिया जाता है. कुछ मतदान दल भौगोलिक/सामग्री स्थितियों के आधार पर मतदान के दिन के बाद लौट आते हैं.’

चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि जांच के बाद और पुनर्मतदान की संख्या और कार्यक्रम के आधार पर, वह 11 मई तक लिंग-वार विवरण के साथ अपडेटेड वोटर टर्नआउट प्रकाशित करेगा.

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Source : hindi.news18.com