धरती पर आने से पहले भगवान शिव की जटाओं में क्यों समाईं गंगा? जानें रोचक कथा – News18

शुभम मरमट / उज्जैन. पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाता है. गंगा सप्तमी को हर साल मां गंगा के सृष्टि पर प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है.हिंदू संस्कृति में गंगा सप्तमी का बहुत महत्व है.यह त्योहार हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. इस साल गंगा सप्तमी 14 मई, 2024 को मनाई जाएगी.उज्जैन के ज्योतिषआचार्य रवि शुक्ला से जानिए विस्तार से.

गंगा सप्तमी 2024 तिथि और समय
सप्तमी तिथि प्रारंभ – 13 मई, 2024 को शाम 05:20 बजे
सप्तमी तिथि समाप्त – 14 मई, 2024 को शाम 06:49 बजे

गंगा सप्तमी पूजा विधि
गंगा सप्तमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करें. अगर ऐसा संभव न हो तो घर में नहाने के पानी में गंगाजल में मिलाकर स्नान करें. इसके पश्चात मां गंगा की तस्वीर पर या गंगा नदी में फूल, सिंदूर, अक्षत, गुलाल,लाल फूल, लाल चंदन अर्पित कर दें. इसके बाद घी का दीपक जलाकर आरती करें. इसके बाद जीवन में सुख और शांति के लिए मां गंगा से प्रार्थना करें.धार्मिक मान्यता है कि गंगा सप्तमी के दिन गंगा स्नान करने से इंसान को सभी पापों से मटकी मुक्ति हैं. सभी पापों से मुक्ति मिलने के साथ रोगों से छुटकारा मिलता है और दान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.

पौराणिक ग्रंथो मे मिलती है गंगा सप्तमीकी कथा
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, देवी गंगा पहली बार गंगा दशहरा के दिन धरती पर उतरी थीं, लेकिन ऋषि जह्नु ने सारा गंगा जल पी लिया. तब सभी देवताओं और भागीरथ ने ऋषि जह्नु से गंगा को छोड़ने का अनुरोध किया.इसके बाद गंगा सप्तमी के दिन देवी गंगा फिर से धरती पर आईं और इसीलिए इस दिन को जह्नु सप्तमी भी कहा जाता है.

गंगा सतमी दूसरी कथा
एक बार, कोसल के राजा भागीरथ परेशान थे क्योंकि उनके पूर्वज बुरे कर्मों के पापों से पीड़ित थे.भागीरथ चाहते थे कि वे इससे मुक्त हों, इसलिए उन्होंने भगवान ब्रह्मा की कठोर तपस्या की और भगवान ब्रह्मा ने उन्हें आश्वासन दिया कि गंगा पृथ्वी पर आएंगी, उनके पूर्वजों की आत्मा को शुद्ध करेंगी.लेकिन वह जानते थे कि देवी गंगा का प्रवाह सब कुछ नष्ट कर सकता है, तब ब्रह्मा जी ने भागीरथ को भगवान शिव की पूजा करने के लिए कहा क्योंकि वे ही गंगा के प्रवाह को नियंत्रित कर सकते हैं. इसलिए उन्होंने अपनी कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न किया और इस शुभ दिन देवी गंगा पृथ्वी पर उतरीं, इसलिए गंगा को भागीरथी के नाम से जाना जाता है.

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