खरीफ के सीजन में इस फसल की करें खेती, धान की तुलना में 80 प्रतिशत पानी की बचत – News18

कुंदन कुमार/ गया:- खरीफ सीजन में इस बार कृषि विभाग के द्वारा मोटे अनाज की खेती पर जोर दिया जा रहा है. खास तौर पर दक्षिण बिहार के जिले जैसे गया, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद में कम वर्षापात होती है, जिस कारण यहां के किसान खरीफ सीजन में बारिश पर निर्भर रहते हैं. बारिश नहीं होने पर यहां के अधिकांश जमीन परती रह जाते हैं. ऐसे में कृषि विभाग किसानों को मोटे अनाज की खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. बात करें गया जिला की, तो यहां औसतन 980 मिलीमीटर बारिश होती है. लेकिन पिछले 2 साल से 650 से लेकर 690 एमएम तक बारिश हुई है, जिस कारण किसानों को खेती में काफी समस्या आई है.

खरीफ सीजन में क्यों करें मोटे अनाज की खेती?
खरीफ सीजन में इस बार गया जिले में लगभग 24000 एकड़ में मक्का की खेती, जबकि लगभग 10000 एकड़ में मिलेट्स की खेती कराई जाएगी. अब सवाल उठता है कि गया और दक्षिण बिहार के जिले के किसान खरीफ सीजन में धान की जगह मिलेट्स और मोटे अनाज की खेती क्यों करें? इस पर गया जिला कृषि पदाधिकारी अजय कुमार सिंह लोकल18 को बताते हैं कि पिछले दो सालों से गया जिले में औसतन वर्षापात में काफी गिरावट आई है. इसके अलावा यहां सिंचाई की व्यवस्था काफी कम है. गर्मी के दिनों में यहां जलस्तर काफी नीचे चला जाता है.

कृषि पदाधिकारी अजय कुमार Local18 को आगे बताते हैं कि जिले में पानी की कमी को देखते हुए मोटे अनाज की खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है, क्योंकि मोटे अनाज की खेती में कम पानी की जरूरत होती है. मोटे अनाज में मक्का की खेती में धान की तुलना में महज 30% पानी की जरूरत होती है, जबकि अन्य मिलेट्स की खेती में महज 20% पानी की जरूरत होती है. इसके अलावा उत्पादकता की बात की जाए, तो मिलेट्स का उत्पादकता धान से बहुत ज्यादा कम नहीं है. वहीं मक्का का उत्पादकता धान से ज्यादा है और रेट भी धान से अधिक मिलता है. जिले में धान की उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 35 क्विंटल तक है, जबकि मक्का का उत्पादन 60 क्विंटल तक होता है.

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इतने दिन में होता है उत्पादन
इसके साथ अगर इसकी खेती की ड्यूरेशन की बात की जाए, तो मोटे अनाज और मक्का की खेती में अधिकतम 90 से 120 दिन का समय लगता है. लेकिन धान की खेती में न्यूनतम 120 दिन का समय लगता है. वहीं मोटे अनाज का न्यूट्रीशनल वैल्यू, धान की तुलना में काफी अधिक है और यही वजह है कि मोटे अनाज को श्री अन्न सुपर फुड का दर्जा दिया गया है. इसीलिए इस साल खरीफ सीजन में मोटे अनाज की खेती पर जोर दिया जा रहा है. उन्होंने जिले के किसानों से अपील करते हुए कहा कि खरीफ सीजन में जहां बरसात कम होती है, उन क्षेत्रों में मोटे अनाज की खेती पर ध्यान केंद्रित करें. इसमें किसानो को बीज उपादान के क्रय पर अनुदान के रूप में 2000 रुपए और इसकी खेती करने पर प्रोत्साहन के रूप में 2000 रुपए दिए जाएंगे.

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