उत्तराखंड में पहली बार इस तकनीक से हुई रेटिना की सफल सर्जरी – News18

हिना आज़मी/ देहरादून. उत्तराखंड में पहली बार रेटिना की ऐसी सफल सर्जरी की गई है, जिसमें टाइटेनियम मैकुला बकल तकनीक का प्रयोग कर 64 वर्षीय बुजुर्ग को ठीक किया गया है. यह तकनीक हमारे देश मे ज्यादा अस्पतालों में नही प्रयोग होती है. रेटिना के पर्दे के खसकने के बाद यह ऑपरेशन किया जाता है जिसमें धातु के बकल के सपोर्ट से बाहर से ऑपरेशन किया जाता है, जिससे रिकवरी जल्दी लग सके.

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के राही नेत्र धाम अस्पताल के डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई जब एक 64 साल के बुजुर्ग एक आंख के पर्दे में दिक्कत के साथ उन्हें दिखाने के लिए आए और उन्होंने इस नई तकनीक से उनके सफल ऑपरेशन किया. नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ चिंतन देसाई ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए कहा कि यह बुजुर्ग मरीज हमने हरिद्वार के हंस फाउंडेशन अस्पताल में देखा था जिनकी एक आंख का पर्दा अपनी जगह से खिसक गया था और उनकी सर्जरी टाइटेनियम मैकुला बकल के माध्यम से होनी थी जिसकी कीमत 40 से ₹50 है इसके अलावा ऑपरेशन इक्विपमेंट्स का अलग खर्च होता है. बुजुर्ग की आर्थिक स्थिति इतनी बेहतर नहीं थी कि वह इतना खर्चा उठा पाए इसलिए अस्पताल के ट्रस्ट ने सर्जरी के लिए निःशुल्क बकल उपलब्ध करवाया जिसके बाद बुजुर्ग का सफल ऑपरेशन किया गया. बता दे कि आयुष्मान भारत की योजना में इस तकनीक के लिए इतना बजट सुनिश्चित नहीं है इसलिए थोड़ा सर्जरी के साधन का खर्च आयुष्मान योजना के अंतर्गत किया गया.

जल्द रिकवरी के लिए उपयोगी है यह तकनीक

इस तकनीक से सर्जरी करना बहुत मुश्किल है इसलिए डॉ चिंतन देसाई के साथ-साथ डॉ मोहित ने भी इस काम में अहम भूमिका निभाई. डॉ चिंतन बताते हैं कि रेटिनल डिटैचमेंट या पर्दे का अपनी जगह से है जन सामान्य बात है जिसमें दो तरीके से सर्जरी की जाती है एक जो अंदरूनी सर्जरी होती है दूसरी बकल के माध्यम से बाहरी सर्जरी होती है जो टाइटेनियम धातु की मदद से बाहर से की जाती है जिससे मरीज जल्द ही ठीक हो सके. ज्यादा जानकारी के लिए आप070780 82666 ओर सम्पर्क कर सकते हैं.

FIRST PUBLISHED : June 2, 2024, 12:19 IST

Source : hindi.news18.com